Dr. Atul Malikram, Political Strategist

About the Author

Dr. Atul Malikram is a nationally acclaimed political strategist, public relations expert, author, and social change leader. With over two decades of experience, he founded PR 24×7 in 2006 and has since become a trusted voice in Hindi heartland politics. His accurate predictions—such as the Scindia faction joining BJP and the NDA securing 294 seats in the 2024 elections—reflect his deep political understanding.
Recognized with the Godfrey Phillips Red and White Gold Award and an Honorary Doctorate in Political Science, Dr. Malikram has also authored several popular books and established India’s first anger management café, Bhadas.
His social initiative Being Responsible operates multiple welfare programs for elders, birds, and underprivileged communities. Through his #2030KaBharat campaign, he actively supports India’s Sustainable Development Goals, advocating for zero poverty, zero hunger, education, and prison reforms

Politics & Business

कसक दिल की / Kasak Dil Ki

Dr. Atul Malikram

Summary

‘कसक दिल की’ अतुल मलिकराम द्वारा लिखित ‘दिल से…’ किताब का पाँचवाँ संस्करण है। लेखक के विचारों से ओतप्रोत यह किताब राजनीति, शिक्षा, प्रेरणा, समाज, संस्कृति और व्यवसाय जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल करती है। ‘कसक दिल की’ के लेख समाज की उधेड़-बुन, देश में शिक्षा क्षेत्र में बदलाव की जरुरत, प्रेरणादायी जीवन, राजनीतिक उठा-पटक, व्यापार आदि को नई दिशा देने के प्रयासों पर आधारित हैं।

इस किताब को लिखने का उद्देश्य समाज के प्रति लेखक के अनूठे विचारों और दुनिया को देखने के नज़रिए को पाठकों के सामने पेश करना है। समाज को लेकर अलग नज़रिया रखने वाले करोड़ों लोग, जो अपनी बात को शब्दों में नहीं पिरो पाते हैं, यह किताब उनके विचारों जाग्रत करने का काम बखूबी करती है। बात शिक्षा की हो या कलयुग में इंसानियत के बदलते रवैये की, लोकसभा चुनाव की सरजमीं में उथल-पुथल की हो या व्यवसाय को सफलता दिलाने के लिए नए तरीकों को अपनाने की, पूरी दुनिया में प्रसिद्ध भारत की सदियों से चली आ रही संस्कृति और संस्कारों को चक्की में पिसते देखने की हो या देश को आगे बढ़ाने में युवाओं के महत्वपूर्ण योगदान की, इस पुस्तक में शामिल हर एक लेख भावनाओं और विचारों का काफिला साथ लिए चलता है। अपने प्रेरणादायक लेखों के माध्यम से समाज को नए विचार देने का साहस रखने वाली यह किताब पाठकों के दिलों को गहराई से छू लेने का वादा करती है।

Socio-Economic Commentary

दिल ज़रा / Dil Zara

Dr. Atul Malikram

Summary

‘दिल से’ किताब का सातवाँ संस्करण ‘दिल ज़रा’ हमारे समाज की गंभीर समस्याओं और उनके समाधान की संभावनाओं पर रोशनी डालने का काम करता है। यह किताब वर्ष 2030 तक भारत के सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में गरीबी, भूख, शिक्षा, जेल व्यवस्था और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों को नए दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करती है।

‘दिल ज़रा’ न सिर्फ उपरोक्त समस्याओं को उजागर करती है, बल्कि पाठकों को यह सोचने पर मजबूर भी कर देती है कि इन जटिलताओं को सुलझाने के लिए किस तरह के कदम उठाए जा सकते हैं। सामाजिक विषमताओं को खत्म करने, शिक्षा को और सुलभ बनाने और जेल व्यवस्था में सुधार लाने जैसे विषयों को इस पुस्तक में संवेदनशीलता और गंभीरता से उठाया गया है।

यह सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि एक विचार है, जो हमें अपने भविष्य की दिशा में एक सार्थक और सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित करती है। ‘दिल ज़रा’ हर पाठक के मन में सवाल उठाने और उनके भीतर बदलाव की चिंगारी जगाने का प्रयास है। यह एक आह्वान है उन सभी के लिए, जो एक उन्नत, समान और संवेदनशील भारत के निर्माण का सपना देखते हैं।

Socio-Economic Challenges

दिल मेरा / Dil Mera

Dr. Atul Malikram

Summary

‘दिल से’ का छठा संस्करण ‘दिल मेरा’ किताब सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों पर आधारित है, जिसमें सतत विकास के वर्ष 2030 के भारत के लक्ष्य को हासिल करने वाले प्रमुख विषय शामिल किए गए हैं। इसमें गरीबी, भूख, शिक्षा, जेल और अन्य प्रमुख मुद्दों का समावेश किया गया है, जो समाज की जटिलताओं और भविष्य के लिए आवश्यक बदलावों को उजागर करते हैं। इस किताब का उद्देश्य समाज के विभिन्न पहलुओं पर गहरी सोच और संवेदनशीलता को जागृत करना है, ताकि हम एक ऐसे भारत की कल्पना कर सकें, जो न सिर्फ आर्थिक, बल्कि समाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी उन्नत हो। इस किताब के लेखों के माध्यम से, मैं उन महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार करना चाहता हूँ, जो हमारे देश की वास्तविकता से जुड़े हैं और भविष्य के लिए जरूरी बदलावों का खाका प्रस्तुत करते हैं। समाज में व्याप्त विषमताओं को दूर करने, शिक्षा के स्तर को सुधारने और जेल व्यवस्था में सुधार की जरूरतों को उजागर करते हुए, ‘दिल मेरा’ एक प्रेरणा देने वाली यात्रा है। किताब का उद्देश्य पाठकों को सोचने पर मजबूर करना है, ताकि वे अपने दृष्टिकोण को बदलने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित हों। ‘दिल मेरा’ सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि एक आवाज़ है, जो समाज के गहरे मुद्दों पर चर्चा करने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाती है।

Social & Political Articles

दिल दश्त / Dil Dasht

Dr. Atul Malikram

Summary

दिल दश्त, लेखक द्वारा प्रकाशित की गई पाँचवी पुस्तक है। इसके पहले लेखक की ‘दिल से’, ‘दिल विल’, ‘गल्लां दिल दी’ और अंग्रेजी संस्करण ‘माई दिल गोज़’ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। दिल दश्त पुस्तक लेखक के विचारों से ओतप्रोत है, जो विभिन्न लेखों के अनूठे समागम की पेशकश करती है। यह पुस्तक राजनीति, शिक्षा, प्रेरणा, समाज, संस्कृति और व्यवसाय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित है। दिल दश्त के लेख समाज की उधेड़-बुन, देश में शिक्षा क्षेत्र में बदलाव की जरुरत, प्रेरणादायी जीवन, राजनीतिक उठा-पटक और व्यापार आदि को नई दिशा देने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डालते हैं।

दिल दश्त को समाज के प्रति लेखक के अनूठे विचारों और दुनिया को देखने के नज़रिए को पाठकों के सामने पेश करने के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। समाज को लेकर अलग नज़रिया रखने वाले करोड़ों लोग, जो अपनी बात को शब्दों में नहीं पिरो पाते हैं, यह पुस्तक उनके विचारों को जाग्रत करने का काम बखूबी करती है। बात शिक्षा की हो या आधुनिक दुनिया में इंसानियत के बदलते रवैये की, विधानसभा चुनाव की सरजमीं में उथल-पुथल की हो या व्यवसाय को सफलता के लिए नए तरीकों को अपनाने की, पूरी दुनिया में प्रसिद्ध भारत की सदियों से चली आ रही संस्कृति को चक्की में पिसते देखने की हो या विभिन्न विचारधाराओं की आड़ में धर्मों के घूटते हुए दम की, इस पुस्तक में शामिल हर एक क्षेत्र के संबंधित लेख भावनाओं और विचारों के साथ बेहद खूबसूरती से पिरोए गए हैं। समाज को एक नई दिशा देने के लिए तत्पर यह पुस्तक अपने विशिष्ट लेखों के माध्यम से पाठकों के दिलों को गहराई से छू लेने का वादा करती है।

Politics & Social Articles

दिल विल / Dil Vil

Dr. Atul Malikram

Summary

दिल विल, दिल से… का तीसरा संस्करण है। लेखक के विचारों से ओतप्रोत यह पुस्तक विभिन्न लेखों के अनूठे समागम को शामिल करती है, जो विधानसभा चुनाव 2023, राजनीति, शिक्षा, प्रेरणा, समाज, संस्कृति और व्यवसाय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित है। दिल विल के लेख समाज की उधेड़-बुन, देश में शिक्षा क्षेत्र में बदलाव की जरुरत, प्रेरणादायी जीवन, राजनीतिक उठा-पटक, व्यापार आदि को नई दिशा देने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर बुने गए हैं।

दिल विल को समाज के प्रति लेखक के अनूठे विचारों और दुनिया को देखने के नज़रिए को पाठकों के सामने पेश करने के उद्देश्य से लिखा गया है। समाज को लेकर अलग नज़रिया रखने वाले करोड़ों लोग, जो अपनी बात को शब्दों में नहीं पिरो पाते हैं, यह पुस्तक उनके विचारों जाग्रत करने का काम बखूबी करती है। बात शिक्षा की हो या कलयुग में इंसानियत के बदलते रवैये की, विधानसभा चुनाव की सरजमीं में उथल-पुथल की हो या व्यवसाय को सफलता के लिए नए तरीकों को अपनाने की, पूरी दुनिया में प्रसिद्ध भारत की सदियों से चली आ रही संस्कृति को चक्की में पिसते देखने की हो या बेज़ुबान प्राणियों के लिए सेवा भाव रखने की, इस पुस्तक में शामिल हर एक क्षेत्र के संबंधित लेख भावनाओं और विचारों के साथ बेहद खूबसूरती से पिरोए गए हैं। इस पुस्तक के लेख सिर्फ प्रेरणादायक ही नहीं हैं, बल्कि समाज को नए विचार देने का साहस भी रखते हैं। समाज को एक नई दिशा देने के लिए तत्पर यह पुस्तक अपने विशिष्ट लेखों के माध्यम से पाठकों के दिलों को गहराई से छू लेने का वादा करती है।

Politics & Culture

गल्लां दिल दी / Gallan Dil di

Dr. Atul Malikram

Summary

गल्लां दिल दी, दिल से… किताब का दूसरा संस्करण है, जो विभिन्न लेखों के माध्यम से राजनीति, समाज और संस्कृति, शिक्षा और प्रेरणा, व्यवसाय तथा 2030 के भारत जैसे क्षेत्रों में लेखक के विचारों को शब्दों में पिरोती है। किताब के लेख समाज की उधेड़-बुन, प्रेरणादायी जीवन, राजनीतिक उठा-पटक, व्यापार आदि को नई दिशा देने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर बुने गए हैं।

गल्लां दिल दी, समाज के प्रति लेखक के विचारों और दुनिया को देखने के अपने नज़रिए को पाठकों को सौंपने के उद्देश्य से लिखी गई किताब है। यह किताब गहन अनुभव के साथ जाग्रत हुई सामाजिक संरचना के प्रति उन करोड़ों लोगों की आवाज़ है, जो अपनी सोच को शब्दों का रूप देने में कहीं न कहीं कमी पाते हैं। बात शिक्षा की हो, या कलयुग में इंसानियत के बदलते रवैये की, भारत की सदियों से चली आ रही संस्कृति की हो या पृथ्वी के प्राणियों के प्रति विलुप्त होते सेवा भाव की, हर एक क्षेत्र के संबंधित लेख भावनाओं और विचारों के साथ बेहद खूबसूरती से पिरोए गए हैं। सामाजिक संरचना की नींव की मरम्मत और इसे मजबूत करते हुए यह किताब दिल छू लेने वाले लेखों के माध्यम से समाज के कुछ ऐसे अनछुए मुद्दों को भाव देने का कार्य करती है, जिसका विचार भी आम मस्तिष्क में मुश्किल से घर करता है। किताब के लेख सिर्फ प्रेरणादायक ही नहीं हैं, बल्कि समाज को नए विचार देने का साहस भी रखते हैं। सामाजिक संरचना पर आधारित लेखों के माध्यम से यह किताब पाठकों के दिलों में स्थान बनाने का वादा करती है।

Social Structure / Original

दिल से / Dil se

Dr. Atul Malikram

Summary

दिल से…

दिल से… समाज के प्रति लेखक के विचारों और दुनिया को देखने के अपने नज़रिए को पाठकों को सौंपने के उद्देश्य से लिखी गई किताब है। यह सामाजिक संरचना पर आधारित लेखों के माध्यम से पाठकों के दिलों में स्थान बनाने का वादा करती है। किताब के लेख समाज की उधेड़-बुन, प्रेरणादायी जीवन, राजनीतिक उठा-पटक, व्यापार आदि को नई दिशा देने जैसे महत्वपूर्ण विषयों के इर्द-गिर्द घूमते हैं।

दिल से… सिर्फ एक किताब ही नहीं, बल्कि अनुभव के साथ जाग्रत हुई सामाजिक संरचना के प्रति उन करोड़ों लोगों की आवाज़ है, जो अपनी सोच को शब्दों का रूप देने में कहीं न कहीं कमी पाते हैं। इस किताब को लेखक ने अपने पांच दशकों से अधिक के अनुभव को निचोड़ के रूप में पेश किया है। यह किताब विभिन्न लेखों के माध्यम से शिक्षा, राजनीति, समाज, संस्कृति, प्रेरणा और व्यवसाय संबंधी क्षेत्रों में लेखक के विचारों को सरलता से समझी जा सकने वाली भाषा में व्यक्त करती है। बात कोरोना काल में औंधी चोट खाई हुई शिक्षा की हो, या कलयुग में इंसानियत के बदलते रवैये की, भारत की सदियों से चली आ रही संस्कृति की हो या पृथ्वी के प्राणियों के प्रति विलुप्त होते सेवा भाव की, हर एक क्षेत्र के संबंधित लेख भावनाओं और विचारों के साथ बेहद खूबसूरती से पिरोए गए हैं। सामाजिक संरचना की नींव की मरम्मत करते और इसे मजबूत करते हुए यह किताब दिल छू लेने वाले लेखों के माध्यम से समाज के कुछ ऐसे अनछुए मुद्दों को भाव देने का कार्य करती है, जिसका विचार भी आम मस्तिष्क में मुश्किल से घर करता है। किताब के लेख सिर्फ प्रेरणादायक ही नहीं हैं, बल्कि समाज को एक नई दिशा, नई सोच देने का साहस भी रखते हैं।

Social Issues / SDGs

My Dil Goes | Vol. 3

Dr. Atul Malikram

Summary

In a world racing toward progress, can we afford to ignore the struggles that hold us back?
My Dil Goes (Vol. 03) shines a revealing light on India’s most urgent social challenges—poverty and hunger, unequal education, broken prison systems, and more. Through sharp observations and heartfelt insights, Dr. Atul Malikram explores the obstacles standing in the way of the nation’s journey to achieve the Sustainable Development Goals by 2030.

But this book is not just about identifying problems. It is a call to action. With sensitivity and depth, My Dil Goes urges readers to reflect, question, and imagine the steps needed to create lasting change—be it reducing inequality, making education accessible to all, or rethinking prison reforms.

More than a collection of ideas, My Dil Goes is a movement—an invitation to every citizen who dreams of a progressive, compassionate, and inclusive India. Read it, share it, and let it awaken the will to build a brighter tomorrow.

Societal Perspectives

My Dil Goes Vol. 2

Dr. Atul Malikram

Summary

Dil Goes on.., is the second vol. of My Dil Goes. an eloquent work, intricately conveys societal perspectives, aiming to carve a niche within readers’ hearts by exploring the intricacies of social structures. Covering subjects like societal upheaval, inspirational living, political transformations, and business reorientation, the book serves as a resonant voice for the people. Authored by an individual with over two decades of experience, it condenses a lifetime of insights into vivid portrayals of education, politics, society, culture, motivation, and business.

Beyond being a mere book, Dil Goes On.. serves as an invaluable companion for avid readers.  Within its pages, it confronts the prevailing educational culture, advocating for necessary reforms. Moreover, it explores shifting perspectives and behaviors concerning our rich Indian heritage, delving into the intricacies of political structures and the dynamics of business.

With heartfelt articles, “Dil Goes On..” navigates through unconventional subjects, offering inspiration and boldly carving new pathways in societal discourse. It sheds light on unexplored horizons within a concise narrative, urging readers to contemplate fresh perspectives and embrace innovative ideas.

Societal & Leadership

My Dil Goes

Dr. Atul Malikram

Summary

My Dil Goes.., an eloquent work, intricately conveys societal perspectives, aiming to carve a niche within readers’ hearts by exploring the intricacies of social structures. Covering subjects like societal upheaval, inspirational living, political transformations, and business reorientation, the book serves as a resonant voice for the people. Authored by an individual with over two decades of experience, it condenses a lifetime of insights into vivid portrayals of education, politics, society, culture, motivation, and business.

More than a book, “My Dil Goes..” stands as an invaluable supplement for those cherishing the art of reading. Addressing pandemic-induced educational challenges, delving into India’s ancient culture, and contemplating humanity’s changing demeanor in the age of Kaliyuga, the book laments waning compassion towards Earth’s creatures. Masterfully weaving these ideas together, the author revitalizes societal foundations.

Through heartfelt articles, “My Dil Goes..” tackles uncommon subjects, providing inspiration and daringly charting new paths in societal thought—illuminating unexplored horizons within a succinct narrative.